Image - 2026-05-09 14:43
बरसात की पहली बूंदें जैसे ही गाँव की मिट्टी पर गिरीं, पूरा गाँव खुशबू से महक उठा। छोटे-से गाँव “श्यामपुर” में हर तरफ हरियाली फैल गई थी। खेतों में पानी भर चुका था और पेड़ों पर बैठे पक्षी मधुर आवाज़ में गा रहे थे। गाँव की एक छोटी लड़की, गौरी, अपने दादाजी के साथ कच्ची सड़क पर चल रही थी। उसके हाथ में रंग-बिरंगी छतरी थी और पैरों में कीचड़ लगा हुआ था, लेकिन उसके चेहरे पर मुस्कान थी। रास्ते में बच्चे बारिश में कागज़ की नाव बहा रहे थे। गौरी भी अपनी छोटी नाव लेकर पानी की धारा में छोड़ देती है और खुशी से ताली बजाने लगती है। शाम होते-होते बारिश तेज़ हो गई। गौरी की माँ रसोई में गरमा-गरम पकौड़े और अदरक वाली चाय बना रही थीं। बाहर बारिश की बूंदें टिन की छत पर संगीत जैसी आवाज़ कर रही थीं। पूरा परिवार मिट्टी की खुशबू और बारिश की ठंडी हवा के बीच साथ बैठकर पकौड़े खा रहा था। उस रात गौरी खिड़की से बारिश देखते हुए सोच रही थी कि गाँव की बारिश कितनी सुंदर होती है — जैसे प्रकृति खुद कोई प्यारी कहानी सुना रही हो।
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